Through this blog I have tried to collect various Hindi poems and essays which we grew up reading in our schools.
सोमवार, 29 जून 2009
सेक्रेटरी साहब
एक बार गाँव हमारे सेक्रेटरी साहब आए नई नई बुक-शर्ट पहन कर नया अचम्भा लाये पप्पू राजू मुन्नू चिंटू रिंकू सब घिर आए ब्लाउज ब्लाउज कह कर वो सारे बेहूदे चिल्लाये हम थे ग्राम प्रधान कहा तुम सब हो बहुत निकम्मा ब्लाउज नही ये लली कोट है और जैकेट की अम्मा
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