बुधवार, 24 जून 2009

राधिका का प्रेम तो था बांसुरी की तान से


क्या तुम्हे शब्दों में हम बतलाएं , हमको क्या मिला
गुरु ग्रन्थ साहिब , बाइबल , गीता और कुरान से

चाहता और पूजता जिनको रहा मैं उम्र भर
आज मेरे पास से गुजरे बही अनजान से

दोस्ती हरगिज़ ना करिए ऐसे लोगों से कभी
आँख से सुनते हैं जो और देखते हैं कान से

कल तलक खूंखार डाकू और हत्यारा था जो
देखिये बैठा है वो संसद में कितनी शान से

कृष्ण को तो व्यर्थ ही बदनाम सबने कर दिया
राधिका का प्रेम तो था बांसुरी की तान से

धर्म से करते हो जैसे जात से परिवार से
वैसे थोड़ा प्यार करिए अपने हिन्दुस्तान से

पूछिए मत चाँद सूरज छिप गए जा कर कहाँ
डर गए है जुगनुओं के तुगलकी फरमान से

दिल का टुकडा दे रहा है शुक्र उसका कीजिये
दान कोई भी बड़ा होता ना कन्या दान से

नीरज गोस्वामी

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