गुरुवार, 25 जून 2009

मट्ठे की चाय

श्रीमती से किया निवेदन बना दीजिये चाय
वो बोली घर मैं दूध नहीं है लगा लीजिये गाय

मैं बोला चल बेहूदी करती है मुझसे ठट्ठा
दूध नही यदि तेरे घर में डाल चाय में मट्ठा

मट्ठा कहीं चाय में पड़ता हंसकर बोले मित्र रवि
हमने कहा तमीज न तुमको हम नवयुग के नए कवि

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