बुधवार, 24 जून 2009

मेरी प्यारी अम्मा


घर में झीने रिश्ते मैंने , लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा

सारे रिश्ते जेठ दुपहरी , गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर भीनी सी पुरवाई अम्मा

बाबु जी गुजरे , सब चीज़ें तकसीम हुईं तब
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से आई अम्मा

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