घर में झीने रिश्ते मैंने , लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
सारे रिश्ते जेठ दुपहरी , गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर भीनी सी पुरवाई अम्मा
बाबु जी गुजरे , सब चीज़ें तकसीम हुईं तब
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से आई अम्मा
although i didn't get all the words completely (u know my knowledge of Hindi is not up to the mark)I liked this poem the best...
जवाब देंहटाएंThanx moumita.
जवाब देंहटाएंI ll explain the poem to u.